Panchjanya
आज का श्लोक : कायेन मनसा वाचा धनेनापि जनेन च।
यह श्लोक आधुनिक दौर में राष्ट्र निर्माण और नागरिक दायित्व की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है:- श्लोक- कायेन मनसा वाचा धनेनापि जनेन च। स्वदेशरक्षणार्थाय यतेत मतिमाज्जनः॥ भावार्थ- शरीर, मन, वचन, कर्म, धन तथा जन किसी के भी द्वारा (या सभी से) बुद्धिमान् जन ‘स्वदेशरक्षा’ के प्रयत्न करे। आज के संदर्भ में प्रासंगिकता : सक्रिय बुद्धिमत्ता, […]